BREAKING NEWS

राष्ट्र सेविका समिति, भोपाल विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण वर्ग व प्रकट उत्सव

जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा छत्तीसगढ़ ने बाल विवाह की रोकथाम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश

भोपाल: भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय कार्यालय, एम.पी. नगर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और डॉ. अंबेडकर” विषय पर विशेष व्याख्यान

बाबा साहेब की 135वीं जयंती के अवसर पर RSS की तुलसी बस्ती स्थित भगत सिंह शाखा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

समाज में सैनिकों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान : 16 दिसंबर – प्रहार दिवस: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा राष्ट्रगौरव का स्मरण

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Dec 15, 2025

16 दिसंबर – प्रहार दिवस: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा राष्ट्रगौरव का स्मरण

भोपाल।
16 दिसंबर का दिन भारत के इतिहास में विजय दिवस के रूप में अंकित है। इसी दिन 1971 में भारत ने पाकिस्तान पर निर्णायक विजय प्राप्त की थी और बांग्लादेश का उदय हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस दिन को “प्रहार दिवस” के रूप में पूरे देश में श्रद्धा, अनुशासन और राष्ट्रबोध के साथ मनाता है। इसका उद्देश्य किसी उत्सव मात्र से अधिक, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और सामूहिक चेतना का सुदृढ़ीकरण है।

RSS के अनुसार, प्रहार दिवस भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक धैर्य और नेतृत्व की दृढ़ता का प्रतीक है। इस दिन शाखाओं में बौद्धिक कार्यक्रम, राष्ट्रगीत, सैनिकों के पराक्रम पर चर्चा तथा राष्ट्रसेवा का संकल्प कराया जाता है। इसका केंद्रीय भाव है—राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि समाज के चरित्र और अनुशासन से भी जुड़ी है।

सामाजिक प्रभाव
प्रहार दिवस जैसे आयोजनों से आम नागरिकों के विचार और व्यवहार में ठोस परिवर्तन देखे जाते हैं—

  • राष्ट्रभक्ति का भाव केवल भावना न रहकर कर्तव्यबोध में परिवर्तित होता है।

  • अनुशासन, एकता और सेवा को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

  • समाज में सैनिकों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ती है।

  • युवाओं में कर्तव्यनिष्ठा, आत्मसंयम और सकारात्मक राष्ट्रचिंतन विकसित होता है।

RSS का मानना है कि विजय दिवस को प्रहार दिवस के रूप में मनाना इतिहास की स्मृति को जीवित रखते हुए वर्तमान पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा देता है। यही कारण है कि 16 दिसंबर को यह दिवस राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहभागिता और अनुशासित गरिमा के साथ मनाया जाता है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें