संबोधन की शुरुआत “Sisters and Brothers of America” : 11 सितम्बर 1893: शिकागो में स्वामी विवेकानन्द का ऐतिहासिक भाषण — भारत और विश्व के लिए अमर संदेश
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Sep 11, 2025
11 सितम्बर 1893: शिकागो में स्वामी विवेकानन्द का ऐतिहासिक भाषण — भारत और विश्व के लिए अमर संदेश
नई दिल्ली, 11 सितम्बर।
आज से 132 वर्ष पूर्व, 11 सितम्बर 1893 को शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म संसद (World Parliament of Religions) के मंच से स्वामी विवेकानन्द जी ने जो ऐतिहासिक भाषण दिया, वह आज भी भारत और समस्त विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
भाषण की गूंज
स्वामी विवेकानन्द ने अपने संबोधन की शुरुआत “Sisters and Brothers of America” शब्दों से की। यह वाक्य वहाँ उपस्थित हज़ारों लोगों के हृदय को स्पर्श कर गया और पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
उनके शब्दों ने भारत की आध्यात्मिक धरोहर, वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना और सहिष्णुता की संस्कृति को पूरे विश्व के सामने प्रस्तुत किया।
भाषण का सार
धार्मिक सहिष्णुता: विवेकानन्द ने कहा कि सभी धर्म मानवता के कल्याण के लिए हैं, मत-भेद नहीं, सहयोग ज़रूरी है।
भारत की संस्कृति: उन्होंने भारत को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया, जिसने शांति, सह-अस्तित्व और सत्य की साधना को सर्वोच्च माना।
विश्वबंधुत्व: भाषण का मुख्य संदेश था कि सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं।
विश्व और भारत पर प्रभाव
इस भाषण ने न केवल पश्चिमी दुनिया में भारत की पहचान बदल दी, बल्कि भारतीयों में भी आत्मगौरव की भावना जागृत की। विवेकानन्द का यह उद्बोधन भारतीय नवजागरण का आधार बना और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए मानसिक शक्ति का स्रोत सिद्ध हुआ।
आज के लिए प्रासंगिकता
धार्मिक सहिष्णुता और एकता की आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है।
युवा वर्ग के लिए यह प्रेरणा है कि वे आत्मविश्वास और आत्मगौरव के साथ विश्व के सामने भारत की पहचान रखें।
समाज और राष्ट्र निर्माण में विवेकानन्द का संदेश मार्गदर्शक है।
👉 स्वामी विवेकानन्द का 11 सितम्बर 1893 का भाषण सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मानवता, शांति और सह-अस्तित्व का सनातन संदेश है, जो आने वाली पीढ़ियों को दिशा देता रहेगा।
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