BREAKING NEWS

राष्ट्र सेविका समिति, भोपाल विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण वर्ग व प्रकट उत्सव

जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा छत्तीसगढ़ ने बाल विवाह की रोकथाम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश

भोपाल: भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय कार्यालय, एम.पी. नगर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और डॉ. अंबेडकर” विषय पर विशेष व्याख्यान

बाबा साहेब की 135वीं जयंती के अवसर पर RSS की तुलसी बस्ती स्थित भगत सिंह शाखा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

उनका जीवन साहस, विचार और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है : वीर सावरकर जयंती विशेष: एक क्रांतिकारी जीवन की प्रेरणादायक गाथा

Ashwani Kumar Sinha

Wed, May 28, 2025


वीर सावरकर जयंती विशेष: एक क्रांतिकारी जीवन की प्रेरणादायक गाथा
भोपाल, 28 मई 2025

आज भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, विचारक और समाज सुधारक स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की 142वीं जयंती है। उनका जीवन साहस, विचार और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, जो आज भी युवाओं और नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


🧒 बाल्यकाल और शिक्षा

28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में जन्मे सावरकर जी बचपन से ही साहसी और विद्रोही स्वभाव के थे। 11 वर्ष की आयु में उन्होंने "वानर सेना" का गठन किया, जो उनके नेतृत्व गुणों का प्रारंभिक संकेत था। फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे में अध्ययन के दौरान उन्होंने "अभिनव भारत" नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की।


📚 क्रांतिकारी गतिविधियाँ और कारावास

1906 में कानून की पढ़ाई के लिए लंदन गए सावरकर ने "फ्री इंडिया सोसाइटी" की स्थापना की और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर "The Indian War of Independence" पुस्तक लिखी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया।
1910 में उन्हें गिरफ्तार कर अंडमान के सेलुलर जेल में 50 वर्षों के कारावास की सजा दी गई। वहाँ उन्होंने कठोर यातनाएँ सहते हुए भी अपने विचारों को नहीं छोड़ा।


🕊️ हिंदुत्व और सामाजिक सुधार

1922 में रत्नागिरी में नजरबंदी के दौरान सावरकर ने "हिंदुत्व" की अवधारणा प्रस्तुत की, जो बाद में हिंदू राष्ट्रवाद का आधार बनी। उन्होंने जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई और हिंदू समाज में एकता और सामाजिक सुधार के लिए प्रयास किए।


📝 साहित्यिक योगदान

सावरकर एक प्रतिभाशाली लेखक और कवि थे। उनकी प्रमुख कृतियों में "1857 का स्वतंत्रता संग्राम", "हिंदुत्व", और "माझी जन्मठेप" शामिल हैं। उनकी रचनाएँ आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं।


🗣️ प्रेरणादायक उद्धरण

"जो खो गया, उसका शोक नहीं; जो पाया है, उसका मूल्य नहीं; जो है, उसी का उपयोग सीखो।"
"स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा।"


🏛️ विरासत और स्मरण

सावरकर की विचारधारा और योगदान आज भी भारतीय राजनीति और समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनकी जयंती पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहाँ उनके विचारों और कार्यों को स्मरण किया जाता है।


वीर सावरकर का जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, विचारशीलता और राष्ट्रभक्ति से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी जयंती पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।


विज्ञापन

जरूरी खबरें