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अब समय है सोच बदलने का, भारत के युवा यह ठान लें : विश्व उद्यमिता दिवस : युवा बने “नौकरी खोजने वाले नहीं, नौकरी देने वाले

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Aug 21, 2025

विश्व उद्यमिता दिवस : युवा बने “नौकरी खोजने वाले नहीं, नौकरी देने वाले”

विश्व उद्यमिता दिवस हमें एक कड़वा सच याद दिलाता है – भारत जैसे युवा देश में आज भी अधिकांश बच्चे-युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद सबसे पहले सरकारी या निजी नौकरी की कतार में खड़े दिखाई देते हैं। काबिलियत होने के बावजूद वे उद्यमिता की राह पकड़ने से हिचकते हैं। यही कारण है कि लाखों पढ़े-लिखे युवा वर्षों तक इधर-उधर भटकते रहते हैं।

दूसरी ओर, अमेरिका जैसे देशों में 20–25 वर्ष की उम्र में ही छात्र-युवा स्टार्टअप्स, नई टेक्नोलॉजी और नवाचार पर दांव लगाते हैं। वहाँ समाज असफलता को भी सम्मान की नज़र से देखता है, जबकि भारत में पहली विफलता को “नालायकी” का तमगा दे दिया जाता है। यह मानसिकता हमारे उद्यमशील युवा सपनों को कुचल देती है।

भारत के सामने असली चुनौती

  • परिवार और समाज की सोच – “नौकरी ही सुरक्षित भविष्य है।”

  • शिक्षा व्यवस्था में उद्यमिता-उन्मुख प्रशिक्षण का अभाव।

  • असफलता का डर और पूंजी जुटाने की कठिनाइयाँ।

  • नीतियों और संस्थानों से पर्याप्त मार्गदर्शन का अभाव।

स्वदेशी जागरण मंच का स्पष्ट संदेश

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सतीश भाई जी ने इस अवसर पर कहा –
“भारत की असली ताकत उसकी युवा शक्ति है। लेकिन यह शक्ति तभी सार्थक होगी जब युवा नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनेंगे। उद्यमिता केवल कमाई का जरिया नहीं है, यह आत्मनिर्भर भारत की कुंजी है।”

उन्होंने आगे कहा – विदेशों की राह देखकर चकाचौंध में मत फंसो। भारत की स्वदेशी परंपरा ही असली प्रेरणा है। छोटे उद्योग, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम और तकनीकी नवाचार—यही आपके हाथों में भविष्य की सुनहरी कुंजी है।”

अब समय है सोच बदलने का

आज जरूरत है कि भारत के युवा यह ठान लें –

  • असफलता से डरना नहीं, बल्कि सीखना है।

  • सरकारी नौकरी को अंतिम लक्ष्य न मानकर स्वावलंबन और उद्यम को अपनाना है।

  • स्थानीय से वैश्विक तक नए अवसर खोजना है।

निष्कर्ष

विश्व उद्यमिता दिवस का सशक्त संदेश यही है कि भारत का युवा अब “नौकरी मांगने वाला” नहीं, बल्कि “रोज़गार सृजन करने वाला” बने। यही आत्मनिर्भर भारत की सच्ची दिशा है, और यही भारत को 21वीं सदी का विश्वगुरु बनाएगी।

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