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नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने में किसी भी तरह के लिंग भेद को मान्यता : POCSO जेंडर-न्यूट्रल: पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर—सब पर लागू : कर्नाटक हाईकोर्ट

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Aug 19, 2025

BREAKING NEWS | POCSO जेंडर-न्यूट्रल: पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर—सब पर लागू : कर्नाटक हाईकोर्ट

बेंगलुरु | 18 अगस्त 2025कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट पूरी तरह जेंडर-न्यूट्रल है। यानी किसी भी नाबालिग के साथ यौन अपराध के मामलों में आरोपी पुरुष हो, महिला हो या थर्ड जेंडर—कानून सब पर समान रूप से लागू होगा।

यह फैसला जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल-पीठ ने सुनाया। मामला एक 52 वर्षीय महिला से जुड़ा था, जिस पर पड़ोस में रहने वाले 13 वर्षीय लड़के के साथ मई–जून 2020 के बीच बार-बार यौन शोषण का आरोप लगा था। परिवार 2024 में लौटने पर शिकायत दर्ज हुई और एफआईआर/चार्जशीट के बाद ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लिया। महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर केस रद्द करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 को खारिज कर दिया।

✦ कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ

  1. POCSO जेंडर-न्यूट्रल है

    • कानून का उद्देश्य “बचपन की पवित्रता की रक्षा” है।

    • यह बच्चों की सुरक्षा करता है, चाहे वे किसी भी लिंग के हों।

    • आरोपी पुरुष/महिला/थर्ड जेंडर—कोई भी हो सकता है।

  2. महिला भी आरोपी बन सकती है

    • “महिला केवल निष्क्रिय प्रतिभागी होती है” जैसी दलील को कोर्ट ने पुरानी और अस्वीकार्य बताया।

    • अगर महिला आरोपी द्वारा नाबालिग लड़के को उकसाया/मजबूर किया गया प्रवेश (penetration) कराया जाता है, तो यह भी Section 3 (Penetrative Sexual Assault) के तहत अपराध है।

  3. शिकायत में देरी कोई आधार नहीं

    • याचिकाकर्ता ने दलील दी कि शिकायत दर्ज करने में चार साल की देरी हुई है।

    • कोर्ट ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में देरी स्वतः केस खत्म करने का आधार नहीं बन सकती।

  4. थर्ड जेंडर बच्चों पर भी लागू

    • हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट का संरक्षण “irrespective of sex/gender” है।

    • भारत के NALSA (2014) फैसले के बाद थर्ड जेंडर को विधिक मान्यता मिली है, इसलिए POCSO के तहत थर्ड जेंडर बच्चे भी पूरी तरह संरक्षित हैं।

✦ कानूनी प्रावधान जिनका हवाला

  • Section 3 (POCSO): Penetrative Sexual Assault — “a person” शब्द से शुरुआत, जो पूरी तरह जेंडर-न्यूट्रल है।

  • Section 4/6 (POCSO): ऊपर के अपराधों की सज़ा/एग्ग्रावेटेड रूप; ये प्रावधान भी महिला और पुरुष दोनों पर लागू।

  • IPC Section 8: कानून में सर्वनाम ‘he’ का अर्थ दोनों लिंगों के लिए होता है।

✦ प्रभाव और महत्व

  • यह आदेश कर्नाटक की सभी अधीनस्थ अदालतों पर बाध्यकारी है और अन्य राज्यों में प्रेरक मिसाल (persuasive precedent) रहेगा।

  • बच्चों से जुड़े यौन अपराधों की जांच और ट्रायल में यह फैसला महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देगा।

  • यह स्पष्ट हो गया कि POCSO केवल पुरुष अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला और थर्ड जेंडर आरोपी भी इसके दायरे में आते हैं।

✦ फास्ट FAQ

  • क्या महिला पर भी POCSO लग सकता है? ✔️ हाँ, महिला भी आरोपी बन सकती है।

  • क्या थर्ड जेंडर बच्चे सुरक्षित हैं? ✔️ हाँ, कानून सभी बच्चों की रक्षा करता है।

  • शिकायत देर से हुई तो? ❌ देरी अपने-आप केस खत्म करने का आधार नहीं।

  • अगर महिला ने लड़के को मजबूर कर प्रवेश कराया तो? ✔️ इसे भी Penetrative Sexual Assault माना जाएगा।

✦ आधिकारिक विवरण

  • केस नं.: Crl.P. 12777/2024

  • पीठ: जस्टिस एम. नागप्रसन्ना

  • आदेश दिनांक: 18 अगस्त 2025

  • स्रोत: कर्नाटक हाईकोर्ट ऑर्डर, LiveLaw, Bar & Bench, NDTV

📌 निष्कर्ष:
कर्नाटक हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि POCSO एक्ट पूरी तरह जेंडर-न्यूट्रल कानून है। यह बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया प्रगतिशील
प्रावधान है, जो नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने में किसी भी तरह के लिंग भेद को मान्यता नहीं देता।


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