उनका जीवन आज भी लाखों स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा है : बाला साहब देवरस जी की पुण्यतिथि पर विशेष: एक युगद्रष्टा संघनायक को श्रद्धांजलि
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Jun 17, 2025
🕯️ बाला साहब देवरस जी की पुण्यतिथि पर विशेष: एक युगद्रष्टा संघनायक को श्रद्धांजलि
आज, 17 जून 2025, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तृतीय सरसंघचालक श्री मधुकर दत्तात्रय देवरस जी की पुण्यतिथि है। उन्हें हम सभी बाला साहब देवरस के नाम से जानते हैं। इस अवसर पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, स्मृति गोष्ठियाँ और शाखाओं में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
👤 जीवन परिचय
जन्म: 11 दिसंबर 1915, नागपुर
पारिवारिक पृष्ठभूमि: बचपन से ही राष्ट्रीय विचारधारा में रचे-बसे
शिक्षा: नागपुर विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (LLB)
RSS से जुड़ाव: 12 वर्ष की आयु में स्वयंसेवक के रूप में जुड़ाव, 1946 में ‘सहकार्यवाह’, 1965 में ‘कार्यवाह’
सरसंघचालक कार्यकाल: 1973 से 1994 तक
पुण्यतिथि: 17 जून 1996, पुणे
🌟 प्रमुख योगदान
आपातकाल के दौरान संघ का मार्गदर्शन (1975–77):
बाला साहब जी ने आपातकाल के काले दौर में लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए RSS को संगठित और प्रेरित किया। उन्होंने स्वयं जेल जाकर बलिदान दिया।सामाजिक समरसता पर विशेष बल:
1974 में उन्होंने एक ऐतिहासिक वक्तव्य दिया:
“यदि अस्पृश्यता गलत नहीं है, तो कुछ भी गलत नहीं।”
उनके नेतृत्व में RSS ने सामाजिक एकता और समरसता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए।विस्तृत संगठनात्मक दृष्टिकोण:
ABVP, BMS, Seva Bharati जैसे संगठनों को गति दी, जिससे युवा, मजदूर, महिला एवं समाज के अन्य वर्गों तक संघ की सोच पहुंची।राम मंदिर आंदोलन का नैतिक समर्थन:
उनके काल में RSS ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को वैचारिक दिशा दी, जो भारत की राजनीति व सांस्कृतिक चेतना का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।प्रेरणास्रोत के रूप में जीवनचर्या:
जब स्वास्थ्य खराब हुआ, तब भी उन्होंने संगठन से विमुख नहीं हुए। अपने उत्तराधिकारी प्रो. रज्जू भैया जी का चयन स्वयं किया—यह RSS के इतिहास में पहली बार हुआ।
🕊️ पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलियां
संघ के विभिन्न विभागों एवं शाखाओं में श्रद्धांजलि सभाएं।
सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवकों द्वारा श्रद्धांजलि संदेश:
“तपस्वी जीवन और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रतीक बाला साहब जी को शत-शत नमन।”
“उनका जीवन आज भी लाखों स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा है।”
🔚 निष्कर्ष
बाला साहब देवरस केवल RSS के एक शीर्ष पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक दृष्टा, संगठक और समाज सुधारक थे। उनके विचार आज भी संघ और समाज को नई दिशा देते हैं।
इस पुण्य अवसर पर हम सभी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संकल्प लेते हैं कि राष्ट्र निर्माण की उनकी दृष्टि को हम और अधिक व्यापक बनाएंगे।
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