धरती से जुड़ना ही सबसे बड़ा उपचार है। : सुबह की दूब घास और मिट्टी हमें प्रकृति से जोड़कर भीतर की ऊर्जा जगाती है।
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Sep 19, 2025
सुबह ओस से भीगी दूब घास और साफ मिट्टी पर नंगे पैर चलने के फायदे — आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा के अनुभवों पर आधारित
भोपाल / 19 सितम्बर 2025।
भारत की आयुर्वेद परंपरा और प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान (नेचर क्योर) लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि सुबह की ओस से भीगी दूब घास या साफ-सुथरी मिट्टी पर नंगे पैर चलना अथवा थोड़ी देर खड़े रहना शरीर और मन दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है। हाल के वर्षों में कई चिकित्सकों, योगाचार्यों और प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों से इन लाभों की पुष्टि भी की है।
क्या-क्या लाभ बताए गए हैं?
नसों को शांति और तनाव से राहत
अनुभव: डॉ. आशुतोष गुप्ता, वरिष्ठ प्राकृतिक चिकित्सक, राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (पुणे) बताते हैं कि घास पर चलने से पैरों के तलवों में स्थित अक्युप्रेशर बिंदुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव और चिंता कम होती है।
नेत्र (आँखों) के लिए लाभकारी
आयुर्वेदिक ग्रंथों में उल्लेख है कि सुबह की ओस से भीगी दूब पर चलने से नेत्रज्योति (दृष्टि) में सुधार होता है।
अनुभव: श्रीमती शकुंतला जैन (70 वर्ष, भोपाल) कहती हैं — “मैं पिछले 10 वर्षों से रोज सुबह दूब पर चलती हूँ। मुझे चश्मे का नंबर बढ़ना रुक गया और आँखों में ठंडक रहती है।”
रक्तसंचार और हृदय स्वास्थ्य
पैरों से धरती का सीधा संपर्क शरीर के विद्युत-चुंबकीय संतुलन को साधता है और रक्तसंचार को बेहतर करता है।
अनुभव: योगाचार्य प्रदीप दीक्षित, नागपुर, बताते हैं — “नंगे पैर घास पर चलने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। कई रोगियों ने इसका लाभ महसूस किया है।”
पाचन क्रिया और मोटापा नियंत्रण
सुबह की ठंडी ओस पैरों के माध्यम से शरीर को शीतलता देती है, जो पाचन अग्नि को संतुलित करती है।
अनुभव: आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुभाष शर्मा (इंदौर) कहते हैं — “जिन मरीजों को कब्ज और गैस की शिकायत रहती थी, उन्हें मैंने नियमित रूप से दूब पर चलने की सलाह दी, और कुछ ही सप्ताह में सुधार दिखा।”
मानसिक शांति और नींद में सुधार
घास और मिट्टी से जुड़ाव व्यक्ति के भीतर ‘ग्राउंडिंग’ की प्रक्रिया को सक्रिय करता है। इससे मन में स्थिरता आती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
अनुभव: आईटी पेशेवर राहुल मिश्रा (पुणे) कहते हैं — “कार्यालय के तनाव से राहत पाने के लिए मैंने यह आदत शुरू की। अब मुझे गहरी नींद आती है और सिरदर्द कम हो गया है।”
त्वचा और रोग प्रतिरोधक क्षमता
दूब पर मौजूद ओस शरीर को प्राकृतिक नमी और शीतलता प्रदान करती है। इससे त्वचा को लाभ मिलता है और प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) भी मजबूत होती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान, पुणे समय-समय पर इस प्रकार की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने की सलाह देता है।
विशेषज्ञों का मत है कि यह एक सहायक चिकित्सा है, यानी मुख्य रोगों के इलाज के साथ इसे जीवनशैली में जोड़ना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
विशेष सावधानी
मधुमेह (Diabetes) के रोगी, जिनके पैरों में संवेदना कम हो जाती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना नंगे पैर घास या मिट्टी पर चलने से बचना चाहिए।
जगह हमेशा साफ-सुथरी और रसायन-मुक्त चुनें।
निष्कर्ष
सुबह की दूब घास पर ओस की बूंदों में नंगे पैर चलना केवल परंपरा या आस्था ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों के अनुसार स्वास्थ्य संवर्धन का सरल उपाय है। यह तनाव कम करने, आँखों की रोशनी बनाए रखने, रक्तसंचार सुधारने, पाचन में मदद करने और नींद बेहतर करने में कारगर सिद्ध हो सकता है।
“धरती से जुड़ना ही सबसे बड़ा उपचार है। सुबह की दूब और मिट्टी हमें प्रकृति से जोड़कर भीतर की ऊर्जा जगाती है।”
– डॉ. आशुतोष गुप्ता, वरिष्ठ प्राकृतिक चिकित्सक, पुणे
(इसका लाभ लेना हो तो आईए न, भोपाल के महावीर नगर के भगत सिंह शाखा में), भारत माता पार्क, तुलसीनगर,वार्ड क्रमांक 31 में
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