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हरेली पारंपरिक सोच से भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। : छत्तीसगढ़ का पहला पर्व माना जाता है और यह कृषि मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Jul 24, 2025

हरेली: छत्तीसगढ़ का हरियाली और कृषि का पर्व

तिथि और महत्व
हरेली त्योहार सावन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (नवमी अमावस्या) पर मनाया जाता है, जो सामान्यतः जुलाई या अगस्त के बीच पड़ता है। 2025 में यह 24 जुलाई को मनाया जाएगा। इसे छत्तीसगढ़ का पहला पर्व माना जाता है और यह कृषि मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।

कृषि और प्रकृति का उत्सव

  • यह त्योहार खेती-किसानी की शुरुआत के समय मनाया जाता है—खेत तैयार करने, बीज बोने और उनके अंकुरित होने के बाद कृषि औज़ारों की पूजा की जाती है।

  • किसान हल, कुदारी, फावड़ा, गैंती जैसे उपकरणों को साफ़ करके उन्हें दीप, धूप और गुड़ व नारियल से पूजते हैं।

  • औज़ार पूजा के साथ ही गाय, भैंस व बैलों की भी पूजा की जाती है, और खेतों में “भेलवा” और नीम की डालियाँ लगाई जाती हैं ताकि हरियाली बढ़े और कीट रोग न लगें।

लोककला और खेल

  • गेड़ी नृत्य (बांस की ठेंगियों पर चढ़कर नृत्य) इस पर्व की आत्मा है—बच्चे और युवा बड़े उत्साह से इसमें भाग लेते हैं और “गेड़ी दौड़” का आयोजन होता है।

  • साथ ही खो-खो, कबड्डी जैसे देहाती खेल भी आयोजित होते हैं।

  • आदिवासी और कबीलाई समुदाय पारंपरिक गीत, नृत्य और स्थानीय व्यंजनों के साथ उत्सव मनाते हैं।

स्वादिष्ट व्यंजन
इस अवसर पर चिला, गुड़-चीला, कोकाई भाजी, चॉकले रोटी जैसे क्षेत्रीय व्यंजन बनाए जाते हैं। गाय-भैंस को गुड़-चीला खिलाने की भी परंपरा है।

ज्ञान-परंपराओं का आरंभ
इस अवसर पर पारंपरिक वैद्य (बैंगा) बच्चों को औषधीय पौधों और घरेलू नुस्खों का प्रशिक्षण देना शुरू करते हैं, जिसे स्वास्थ्य-विज्ञान की सीख के रूप में देखा जाता है।

पर्यावरणीय जागरूकता

  • नीम की टहनियों को घरों में लगाकर बीमारियों से बचाव का संदेश दिया जाता है।

  • खेतों में प्राकृतिक पौधारोपण को पूजा से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाता है।

सरकारी पहल और समारोह

  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में रायपुर व अन्य शहरों में इसका बड़े स्तर पर आयोजन किया जाने लगा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, गेड़ी प्रदर्शन और लोक नृत्य शामिल होते हैं।

  • ‘गोघन न्याय योजना’ के अंतर्गत हरेली के अवसर पर गाय का मूत्र ₹4 प्रति लीटर खरीदा जाता है, जिसका उपयोग जैविक खेती व कीटनाशक बनाने में होता है।

  • इस पर्व पर छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक अवकाश घोषित होता है; 2025 में यह 24 जुलाई को होगा।

सारांश
हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, पर्यावरण चेतना, लोक खेल और जनजातीय परंपराओं का संगम है। औज़ारों की पूजा से लेकर गेड़ी नृत्य तक, हर पहलू लोगों को उनकी जड़ों और प्रकृति से जोड़ता है। यह पर्व जैविक खेती, लोक संस्कृति और समाज में एकता को बढ़ावा देता है।

बहमुखी महत्व

  • कृषि व पर्यावरण प्रेमियों, लोक कलाकारों और जनजातीय समुदायों के लिए सांस्कृतिक उत्सव।

  • समाज में एकता और साझेदारी की भावना का प्रसार।

  • जैविक खेती और किसान हितों को बढ़ावा देने वाला सरकारी कदम।

  • युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने वाला उत्सव।

हरेली पारंपरिक सोच से भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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