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जीवनशैली और स्वास्थ्य पर गहन पड़ताल : भोजन: जीवनदायी या जीवनघाती? — जब 'अधिक' ही बन जाए बीमारी की जड़

Ashwani Kumar Sinha

Mon, May 19, 2025

भोजन: जीवनदायी या जीवनघाती? — जब 'अधिक' ही बन जाए बीमारी की जड़
विशेष रिपोर्ट: जीवनशैली और स्वास्थ्य पर गहन पड़ताल

भोपाल, 18 मई — “लोग जो भोजन करते हैं, उनमें से आधे भोजन से उनका पेट भरता है और आधे भोजनों से हम डॉक्टरों का।” यह कथन प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. केनेथ वॉकर की आत्मकथा से लिया गया है, जो आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो चला है। वैश्विक और भारतीय संदर्भों में देखा जाए तो एक ओर जहां भूख एक समस्या है, वहीं दूसरी ओर अतिभोजन और गलत आहार कहीं बड़ी त्रासदी बनती जा रही है।

भारत में भोजन से जुड़ी बीमारी का परिदृश्य

राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के पीछे प्रमुख कारण अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें हैं। WHO के आंकड़े बताते हैं कि विश्व में हर साल लगभग 1.7 करोड़ मौतें असंतुलित आहार से जुड़ी बीमारियों से होती हैं। भारत में भी लगभग 60% लोग असम्यक खानपान के कारण गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं।

भूख और अतिभोजन — दोनों ही घातक

एक ओर भारत में 2023 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 121 देशों में 111वें स्थान पर है, वहीं दूसरी ओर मोटापा और डाइबिटीज जैसी बीमारियों में भारत शीर्ष देशों में है। विशेषज्ञों का मानना है कि "भोजन से मरने वालों की संख्या, भूख से मरने वालों से अधिक है।"

इतिहास से उदाहरण: नीरो का पागलपन और आज का समाज

प्रसिद्ध रोमन सम्राट नीरो के बारे में इतिहास में उल्लेख है कि उसने भोजन का आनंद लेने के लिए डॉक्टरों को नियुक्त किया था, जो उसे उल्टी करवाते थे ताकि वह बार-बार खा सके। यह पागलपन आज के समाज में भी दिखता है—"हम नीरो नहीं हैं, लेकिन छोटी मात्रा में वही कर रहे हैं।"

आजकल के लोग "डिटॉक्स", "लिवर क्लीनिंग", "फास्टिंग थैरेपी" जैसे आधुनिक तरीकों से उसी अति का प्रायश्चित कर रहे हैं।

भावदशा और भोजन का संबंध

आधुनिक विज्ञान भी इस सत्य को स्वीकार करता है कि भोजन कैसे और किस भावदशा में खाया गया, उसका प्रभाव उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना भोजन का प्रकार। मानसिक तनाव में खाया गया भोजन पाचन तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे पाचन एंजाइमों का स्त्राव कम हो जाता है और शरीर उसे विष के समान ग्रहण करता है।

अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, तनावग्रस्त मनोदशा में किया गया भोजन मेटाबोलिज्म को 10-20% तक धीमा कर देता है, जिससे मोटापा, एसिडिटी, और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

क्या करें? समाधान की राह

  1. कम खाएं, सही खाएं — भोजन की मात्रा नियंत्रित करें।

  2. चिंता से नहीं, आनंद से खाएं — भोजन करते समय टीवी, मोबाइल से दूर रहें।

  3. अपने शरीर को जानें — दो–तीन महीने ध्यानपूर्वक खाने के बाद स्वयं के लिए उचित आहार की पहचान करें।

  4. नियमित व्रत या अंतराल — “इंटरमिटेंट फास्टिंग” पर वैज्ञानिक शोधों ने भी इसके स्वास्थ्य लाभ सिद्ध किए हैं।

निष्कर्ष

भोजन केवल पेट भरने की क्रिया नहीं, यह स्वास्थ्य, संतुलन और जीवनशैली का मूल आधार है। गलत खानपान से डॉक्टरों के क्लीनिक भरते हैं, सही खानपान से जीवन स्वस्थ बनता है। आज आवश्यकता है कि हम न केवल "क्या खाएं" इस पर ध्यान दें, बल्कि "कैसे खाएं, कितना खाएं और कब खाएं" — इसका भी उतना ही ध्यान रखें।

"साधक हो या सामान्य नागरिक — यदि भोजन के प्रति होशपूर्वक दृष्टि नहीं रखी, तो स्वास्थ्य नहीं, रोग ही हाथ लगेगा।"


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