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भारत की आने वाली पीढ़ियाँ “मॉडर्न लेकिन मर्यादित” बन सकें : बदलते विवाह कानून, संस्कृति और लिव-इन का सत्य — भारतीय समाज के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Jul 3, 2025

📰 विशेष समाचार रिपोर्ट: बदलते विवाह कानून, संस्कृति और लिव-इन का सत्य — भारतीय समाज के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह

✍️ प्रस्तुति: सत्य, शोध और सामाजिक यथार्थ के साथ


🇮🇳 भारत और 🇯🇵 जापान: विवाह की न्यूनतम आयु — पहले और अब

📌 भारत:

  • पूर्व नियम:

    • लड़कों की न्यूनतम विवाह आयु: 21 वर्ष

    • लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु: 18 वर्ष

    • यह प्रावधान 1978 में संशोधित ‘चाइल्ड मैरिज एक्ट’ के तहत लागू हुआ।

  • नया प्रस्तावित कानून (2021 विधेयक):

    • केंद्र सरकार ने ‘प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज (संशोधन) विधेयक 2021’ में लड़कियों की विवाह आयु को भी 21 वर्ष करने का प्रस्ताव किया।

    • उद्देश्य: लैंगिक समानता और शिक्षा/स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

    • यह विधेयक अभी संसदीय स्थायी समिति के पास लंबित है।

🇯🇵 जापान:

  • पहले:

    • लड़कों के लिए 18 वर्ष और लड़कियों के लिए 16 वर्ष (parental consent के साथ)।

  • अब (1 अप्रैल 2022 से):

    • 男女 दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष कर दी गई है।

    • यह बदलाव Japanese Civil Code में संशोधन के तहत हुआ।


🔍 एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और कानून: भारत में वैवाहिक निष्ठा का कायदा

📌 पहले:

  • IPC की धारा 497:

    • केवल पुरुष को दोषी ठहराया जाता था अगर वह किसी विवाहित स्त्री से बिना अनुमति संबंध बनाता।

    • स्त्री को “पति की संपत्ति” मानने वाली यह धारा औपनिवेशिक सोच से प्रेरित थी।

📌 बदलाव:

  • सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (27 सितम्बर 2018)

    • धारा 497 को असंवैधानिक घोषित किया गया।

    • कोर्ट ने कहा: “व्यस्क महिला को अपनी मर्जी से संबंध बनाने का अधिकार है।”

    • अब अवैवाहिक संबंध अपराध नहीं, केवल तलाक का आधार हो सकता है।

🔸 न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा – “किसी भी स्त्री को पुरुष की संपत्ति नहीं माना जा सकता।”


💑 लिव-इन रिलेशनशिप की छूट — खुला या अनियंत्रित?

  • कोई अलग कानून नहीं, परंतु सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों ने इसे मान्यता दी है:

    • 2006 में सुप्रीम कोर्ट: "अगर दो व्यस्क आपसी सहमति से साथ रहते हैं तो यह अपराध नहीं।"

    • 2022 पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट: "यदि लिव-इन रिलेशन सुरक्षा और शांति पर प्रश्न उठाता है, तो यह समाज में असंतुलन फैला सकता है।"

🔹 ध्यान दें: बालिग होना (18+ वर्ष) आवश्यक है। नाबालिग का लिव-इन अवैध है।


🛡️ भारतीय संस्कृति की रक्षा या क्षरण?

✅ संस्कृति क्या कहती है?

  • विवाह भारतीय समाज की संस्कार आधारित संस्था है – केवल सामाजिक करार नहीं, धार्मिक और पारिवारिक जिम्मेदारी

  • विवाह में:

    • गृहस्थ धर्म,

    • संयम,

    • उत्तरदायित्व,

    • वंश परंपरा और

    • संस्कारों का संवहन होता है।

❌ खतरा कहां है?

  • कानूनों में लैंगिक समानता की कोशिश, लेकिन परिणाम:

    • विवाह का मूल्य घट रहा है

    • संयुक्त परिवार और संबंधों की गरिमा पर चोट

    • शादी की देरी, करियर फोकस और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की आड़ में संस्कारों का क्षरण


🧭 समाधान और दिशा:

  1. कानून और संस्कृति का संतुलन आवश्यक:
    केवल कानूनी समानता से समाज नहीं चलता — संस्कृति और मूल्यों की रक्षा ज़रूरी है।

  2. शिक्षा में पारिवारिक संस्कारों की पुनर्स्थापना:
    पाठ्यक्रमों में संस्कार आधारित शिक्षा हो।

  3. मीडिया और वेब सीरीज़ में अनियंत्रित संबंधों की महिमा बंद हो:
    सेंसरशिप की पुनर्व्याख्या हो।

  4. लिव-इन और विवाह को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हों:
    नीति निर्धारण में भारत की संस्कृति और सामाजिक संरचना को प्राथमिकता दी जाए।


📣 निष्कर्ष:
जहां एक ओर भारत कानूनी रूप से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, वहीं सांस्कृतिक आधार और पारिवारिक मूल्यों की नींव कमजोर हो रही है। आज आवश्यकता है – संतुलित सामाजिक विकास की, न कि केवल पश्चिमी नकल की।


📌 यह समाचार रिपोर्ट शुद्ध सत्यता, संवैधानिक न्याय और सांस्कृतिक चेतना पर आधारित है — ताकि भारत की आने वाली पीढ़ियाँ “मॉडर्न लेकिन मर्यादित” बन सकें।

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