प्रशंसा से परे: आत्मा की सच्ची पहचान : तालियाँ और हूटिंग दोनों ही अस्थायी हैं। मैं वही रहूंगा, जो मैं अपने भीतर हूँ
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Jun 2, 2025
जून विशेषांक
प्रशंसा से परे: आत्मा की सच्ची पहचान
लेख: सम्पादकीय टीम
हमारे चारों ओर हर दिन कोई न कोई प्रशंसा करता है — “आप बहुत अच्छे हैं”, “आप जैसा कोई नहीं”, “आप अद्भुत कार्य कर रहे हैं।” यह सुनकर मन को सुख जरूर मिलता है, लेकिन क्या यही सुख आत्मिक विकास की अंतिम सीढ़ी है?
प्रशंसा यदि विवेक के साथ न ग्रहण की जाए, तो वह धीरे-धीरे व्यक्ति को भ्रम में डाल सकती है। मन यह मानने लगता है कि मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ, और वहीं से गिरावट की शुरुआत होती है। सच्चा साधक वही है जो प्रशंसा को फूल की तरह स्वीकार करता है — उसकी सुगंध का अनुभव करता है, पर उसे मस्तक पर नहीं चढ़ने देता।
गांधीजी: विनम्रता का जीवन-प्रमाण
महात्मा गांधी को “राष्ट्रपिता” कहा गया, उन्हें संसार ने पूज्य माना, परंतु उन्होंने कभी इन उपाधियों को अपने हृदय में स्थान नहीं दिया। एक अवसर पर किसी ने कहा, “बापू, आप जैसे महापुरुष तो युगों में एक बार जन्म लेते हैं।” गांधीजी मुस्कराए और उत्तर दिया:
“यदि मैं इन बातों को सच मान लूं, तो मेरा ध्यान अपने कर्तव्य से हट जाएगा।”
डॉ. कलाम: विनम्रता में महानता
भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, जब राष्ट्रपति बने, तब भी उन्हें छात्रों से मिलने में सबसे अधिक आनंद आता था। वे अक्सर कहा करते थे:
“तालियों की गूंज कभी स्थायी नहीं होती। मेरा मूल्य मेरे कर्म तय करेंगे।”
यह वह भावना है जो व्यक्ति को धरती से जोड़ती है, भले ही वह आकाश जितनी ऊँचाई पर क्यों न हो।
बिल रसेल: जब हूटिंग ने पाठ पढ़ाया
प्रशंसा से परे जाने का एक प्रेरक उदाहरण है — महान बास्केटबॉल खिलाड़ी बिल रसेल। 11 बार एनबीए चैंपियन रहे रसेल को एक बार एक बड़े समारोह में आमंत्रित किया गया। लेकिन जब वे मंच पर पहुँचे, तो स्वागत में तालियाँ नहीं, बल्कि हूटिंग (मज़ाक उड़ाने वाली सीटी और आवाज़ें) हुईं।
रसेल तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने शांत स्वर में कहा:
“तालियाँ और हूटिंग दोनों ही अस्थायी हैं। मैं वही रहूंगा, जो मैं अपने भीतर हूँ।”
यह वक्तव्य उन सबके लिए एक दर्पण था, जो प्रशंसा के पीछे दौड़ते हैं।
आंतरिक स्थिरता का सूत्र
सत्य यह है कि न तो प्रशंसा आपको ऊँचा बनाती है और न ही आलोचना आपको नीचा करती है। जो व्यक्ति अपनी पहचान को बाहरी शब्दों में नहीं, बल्कि अपने कर्मों में खोजता है — वही आत्मा की सच्ची गहराई को छूता है।
समाचार विशेष संदेश:
🌱 जब कोई आपकी प्रशंसा करे, तो उसे मुस्कान के साथ स्वीकार करें, धन्यवाद कहें, और अपने पथ पर आगे बढ़ते रहें।
🌿 याद रखें, पुष्प की सुगंध सबको भाती है, लेकिन वह केवल तभी टिकती है जब पुष्प जड़ से जुड़ा हो।
🕊️ इसलिए अपने जड़ों को कर्म, विनम्रता और आत्मचिंतन में स्थिर रखें — वही जीवन की सच्ची ऊँचाई है।
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