BREAKING NEWS

भोप29 सितंबर को शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय, जहांगीराबाद में एनसीसी इकाई के तत्वावधान में

भोपाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, भोपाल द्वारा प्राप्त शिकायतों तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच

56 भोग की शिकायत पर एक घंटे में पहुंची टीम प्रतिष्ठान से बेसन बर्फी, केक, पापड़ और क्रीम रोल के नमूने भी जांच के लिए

कोरबा, 28 सितंबर 2026। बलगी नगर स्थित शिव काली मंदिर में स्वर्गीय गिरवर सिंह बिसेन की पुण्य स्मृति एवं स्वर्गीय हनुमान

भोपाल। शासकीय गीतांजलि कन्या स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल में

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

कुछ प्रभावी घरेलू उपाय बताए गए हैं: : पेट की गर्मी: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान

Ashwani Kumar Sinha

Fri, May 16, 2025


पेट की गर्मी: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान

नई दिल्ली, 16 मई 2025 — गर्मी के मौसम में या अत्यधिक मसालेदार भोजन के बाद पेट में गर्मी होना एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन जाती है। आयुर्वेद में इसे "अग्नि की असंतुलन स्थिति" माना जाता है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित करती है और शरीर में अम्लता (एसिडिटी), गैस और जलन जैसी समस्याएं उत्पन्न करती है।

पेट में गर्मी के प्रमुख लक्षण:

विशेषज्ञों के अनुसार, पेट की गर्मी की पहचान निम्न लक्षणों से की जा सकती है:

  • सीने और गले में जलन

  • मुंह में खट्टापन और खट्टी डकारें

  • घबराहट, उल्टी जैसा महसूस होना

  • कब्ज, पेट फूलना और गैस बनना

  • सिर दर्द और थकावट

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

गैस्ट्रोएन्टरोलॉजिस्ट बताते हैं कि जब पेट में एसिड का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह अम्लता बढ़ा देता है। यह एसिड अन्ननली (esophagus) तक चढ़ सकता है, जिससे जलन और बदहजमी की स्थिति बनती है। यह स्थिति अधिकतर असंतुलित खानपान, तनाव और देर रात भोजन के कारण होती है।

आयुर्वेद और घरेलू उपाय:

आयुर्वेद के अनुसार, पेट को ठंडा रखना और पाचन अग्नि को संतुलित करना ही इस समस्या का मूल समाधान है। नीचे कुछ प्रभावी घरेलू उपाय बताए गए हैं:

  1. केला: पोटैशियम युक्त केला एसिड को नियंत्रित करता है और पेट को एक प्राकृतिक परत प्रदान करता है, जिससे जलन में राहत मिलती है।

  2. तुलसी: तुलसी के अर्क या पत्तों का सेवन पेट में पानी की मात्रा बढ़ाकर एसिड को नियंत्रित करता है।

  3. ठंडा दूध: दूध में कैल्शियम होता है, जो पेट के अतिरिक्त एसिड को शोषित करता है और तात्कालिक राहत देता है।

  4. सौंफ और इलायची: ठंडी तासीर के ये मसाले पाचन को बेहतर बनाते हैं और भोजन के बाद अम्लता को कम करते हैं।

  5. ज़ीरा और पुदीना: ये पाचन एंजाइम को सक्रिय करके पेट को ठंडा और हल्का बनाए रखते हैं।

  6. सूखी अदरक और लौंग: ये पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं और पेट में अल्सर या गैस की शिकायत को दूर करते हैं।

  7. आंवला: विटामिन सी से भरपूर आंवला पेट की जलन और गर्मी को शांत करने में अत्यंत उपयोगी है।

निष्कर्ष:

आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर पेट की गर्मी जैसी समस्या को बिना दवा के भी ठीक किया जा सकता है। संतुलित आहार, समय पर भोजन और तनाव से दूरी पेट की सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है।


विज्ञापन

जरूरी खबरें