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चेक बाउंस क्या है और यह अपराध कैसे बनता है? : 138 निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस) की संपूर्ण प्रक्रिया पर आधारित जन-जागरूकता समाचार 📰

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Jun 9, 2025

📰 138 निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस) की संपूर्ण प्रक्रिया पर आधारित जन-जागरूकता समाचार 📰

"चेक बाउंस" पर कानून क्या कहता है? – जानिए अपने अधिकार और कानूनी प्रक्रिया

भोपाल, 9 जून 2025 – आम नागरिकों, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के बीच चेक के लेन-देन को लेकर विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। आए दिन "चेक बाउंस" होने की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन कई लोग इससे जुड़े कानूनी विकल्पों और प्रक्रिया के बारे में अनजान होते हैं।

इस स्थिति को देखते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल मेहरा द्वारा दी गई जानकारी और प्रारूपित कानूनी नोटिस के आधार पर निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस की पूरी प्रक्रिया को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है:

चेक बाउंस क्या है और यह अपराध कैसे बनता है?

जब बैंक किसी चेक को "अपर्याप्त राशि", "खाता बंद", "हस्ताक्षर भिन्न", या अन्य कारणों से भुगतान से इनकार करता है, तो इसे "चेक अनादर" (बाउंस) कहा जाता है। इस स्थिति में धारा 138 के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। यह एक समरी ट्रायल (संक्षिप्त न्यायिक प्रक्रिया) होता है, जो क्रिमिनल कोर्ट में सुना जाता है।

कानूनी प्रक्रिया – चरण दर चरण

1. लीगल नोटिस भेजना

  • चेक बाउंस होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर चेक जारीकर्ता को कानूनी नोटिस भेजा जाना चाहिए।

  • नोटिस में 15 दिनों की समयसीमा दी जाती है कि वह राशि चुका दे।

  • यदि भुगतान नहीं होता, तो 30 दिनों के भीतर न्यायालय में परिवाद पत्र दाखिल किया जा सकता है।

2. कोर्ट फीस

  • ₹1 लाख तक – 5%

  • ₹1 लाख से ₹5 लाख – 4%

  • ₹5 लाख से अधिक – 3%
    (स्टांप शुल्क के रूप में)

3. महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • ओरिजिनल चेक

  • बैंक से मिला रिटर्न मेमो

  • लीगल नोटिस और उसकी डिलीवरी की रसीद

  • परिवाद पत्र (विवरण सहित)

  • गवाहों की सूची (यदि कोई हो)

4. समन, वारंट और सुनवाई

  • आरोपी को कोर्ट समन जारी करता है।

  • अनुपस्थिति की स्थिति में वारंट भी जारी हो सकता है।

  • आरोपी क्रॉस एक्जामिनेशन का हकदार होता है।

  • आरोपी को दोषमुक्त सिद्ध करने का अवसर प्राप्त होता है।


समझौते और दंड

यह अपराध समझौतायोग्य है। यदि दोनों पक्ष अदालत में समझौता कर लेते हैं तो मामला समाप्त हो सकता है।
यदि आरोपी दोषी पाया जाता है तो उसे 2 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
यह जमानती अपराध है, और दोषसिद्धि की स्थिति में अपील का अधिकार सुरक्षित होता है।


नवीन संशोधन: धारा 143A

साल 2018 में हुए संशोधन के अनुसार, परिवादी कोर्ट से यह मांग कर सकता है कि आरोपी चेक राशि का 20% अग्रिम रूप से जमा करे।


एक व्यावहारिक कानूनी नोटिस का प्रारूप भी उपलब्ध

नीचे दिए गए प्रारूप के अनुसार वकील द्वारा नोटिस भेजा जाना चाहिए, जिसमें चेक का विवरण, बाउंस की तारीख, राशि, और भुगतान की मांग स्पष्ट रूप से लिखी हो।

यह नोटिस स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड एडी से भेजना अनिवार्य है ताकि सेवा की पुष्टि की जा सके।


निष्कर्ष: न्याय के लिए जागरूकता आवश्यक

चेक बाउंस केवल एक वित्तीय असहमति नहीं, बल्कि एक दंडनीय अपराध है। यदि समयसीमा के भीतर सही विधिक कदम उठाए जाएं, तो न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

सावधानी, समयबद्ध कार्रवाई और कानूनी जानकारी ही समाधान का रास्ता है।

🖋️ रिपोर्ट
(स्रोत: एडवोकेट कपिल मेहरा द्वारा साझा विधिक जानकारी व प्रारूप नोटिस)

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