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कोर्ट ने यह भी पाया कि वकील ने अहम तथ्य छिपाए : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने के प्रयास एक वकील पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Apr 4, 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने के प्रयास पर सख्त रुख अपनाते हुए एक वकील पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

यह आदेश जस्टिस गौतम चौधरी की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया, जिसमें अदालत ने वकील के आचरण को न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप और समय की बर्बादी बताया।

क्या है पूरा मामला

मामला अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा था, जिसमें दो आरोपियों ने धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं में राहत मांगी थी। सुनवाई के दौरान संबंधित वकील ने बीमारी का पर्चा भेजकर अनुपस्थित रहने की सूचना दी।

हालांकि, जांच में सामने आया कि उसी दिन वकील दूसरी अदालत—यहां तक कि मुख्य न्यायाधीश की पीठ—के समक्ष पेश हो रहा था। इसे अदालत ने “भ्रामक आचरण” माना।

महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने पर नाराज़गी

कोर्ट ने यह भी पाया कि वकील ने अहम तथ्य छिपाए।

आवेदकों को पहले ही एक अन्य कार्यवाही में अंतरिम राहत (गिरफ्तारी से सुरक्षा) मिल चुकी थी

इसके बावजूद अदालत को इसकी जानकारी नहीं दी गई

अदालत ने कहा कि इस तरह का व्यवहार न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न करता है, खासकर तब जब अदालतों पर पहले से ही मामलों का भारी बोझ है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने टिप्पणी की कि वकील का आचरण “अदालत को धोखा देने का प्रयास” है और इससे न्यायिक समय की अनावश्यक बर्बादी हुई।

जुर्माना और चेतावनी

कोर्ट ने वकील पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि एक महीने के भीतर जमा की जाए।

साथ ही चेतावनी दी गई कि तय समय में भुगतान न करने पर मामले को बार काउंसिल के पास कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है।

कुल मिलाकर, हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि अदालत को गुमराह करना या तथ्य छिपाना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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