व्यायाम या थेरेपी को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट : मासिक धर्म और फिजियोथेरेपी: राहत, समझ और संतुलन का संगम
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Jan 13, 2026
मासिक धर्म और फिजियोथेरेपी: राहत, समझ और संतुलन का संगम
महिलाओं के जीवन में मासिक धर्म एक स्वाभाविक और आवश्यक जैविक प्रक्रिया है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है। यह हार्मोनल बदलावों के कारण हर माह शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि यह सामान्य है, फिर भी कई महिलाएं इस दौरान शारीरिक और मानसिक असुविधाओं का सामना करती हैं। पेट व कमर दर्द, थकान, सिरदर्द, मूड स्विंग्स और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं आम हैं। कुछ महिलाओं में यह दर्द इतना तीव्र होता है कि दैनिक कार्य और शारीरिक गतिविधियां भी प्रभावित हो जाती हैं।
आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली, तनाव और हार्मोनल असंतुलन के कारण अनियमित मासिक धर्म की समस्या भी बढ़ रही है। ऐसे में फिजियोथेरेपी शरीर को संतुलित करने का एक सुरक्षित, प्राकृतिक और प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। योग आधारित फिजियोथेरेपी, कोर एवं पेल्विक मांसपेशियों की स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और रिलैक्सेशन तकनीकें दर्द, ऐंठन और थकान को कम करने में सहायक होती हैं। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिजियोथेरेपी न केवल शारीरिक राहत देती है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी बढ़ाती है। प्रत्येक महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी व्यायाम या थेरेपी को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना आवश्यक है।
सही मार्गदर्शन के साथ फिजियोथेरेपी उपचार मात्र नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है, जो महिलाओं को मासिक धर्म के हर चरण में सशक्त और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है।
— डॉ. नेहा यादव (फिजियोथेरेपिस्ट)
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