: नजरीया बदले
Admin
Mon, Sep 11, 2023
हमें अपनी दृष्टिकोण को बदलना मुश्किल होता है। हमारा एटीट्यूड और इंप्रेशन, स्वभाव और प्रभाव, हमें बदलने नहीं देता। हमारे स्वभाव को हमने स्वीकार किया है। मेरा स्वभाव ही कुछ ऐसा है कहकर हम बदलने नहीं चाहते। हमारे ऊपर औरों का प्रभाव होता है। अगर मैं बदलूं तो लोग क्या कहेंगे इसी कारण हम बदलने का विचार छोड़ देते हैं। जैसे हम कल थे आज वैसे ही जीते हैं। बस हम अपने जीवन के पीछे के पन्ने से आगे के पन्ने पर कैरी फॉरवर्ड करते रहते हैं। हमारे जीवन में कई उपलब्धियां टर्निंग पॉइंट आ जाते हैं। मगर हम उसे अपना नहीं सकते क्योंकि हम अपना दृष्टिकोण बदलते नहीं। इसीलिए अपना दृष्टिकोण बदलिये। क्योंकि जैसा हम देखते हैं वैसा हम बनते हैं।
एक गांव में दीवार बनाने का कार्य चालू था। वहां तीन मजदूर काम कर रहे थे, वो एक ही जैसा काम कर रहे थे और उनकी मजदूरी एक जैसी ही थी। उनमें से एक को पूछा, "तुम क्या कर रहे हो ? " तो उसने बताया, मैं पेट के लिए कम कर रहा हूं ।" दूसरे से पूछा, तो उसने कहा मैं ईट लगा रहा हूं ।" तीसरे को पूछा तो उसने कहा, मैं एक सुंदर स्मारक बना रहा हूं।" जबकि तीनों एक जैसा ही कम कर रहे थे, फिर भी उस काम के प्रति तीनों की भावना अलग थी । उसमें तीसरे का विचार उच्च था । हमें भी ऐसा ही उच्च विचार करना है।
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