BREAKING NEWS

भोप29 सितंबर को शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय, जहांगीराबाद में एनसीसी इकाई के तत्वावधान में

भोपाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, भोपाल द्वारा प्राप्त शिकायतों तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच

56 भोग की शिकायत पर एक घंटे में पहुंची टीम प्रतिष्ठान से बेसन बर्फी, केक, पापड़ और क्रीम रोल के नमूने भी जांच के लिए

कोरबा, 28 सितंबर 2026। बलगी नगर स्थित शिव काली मंदिर में स्वर्गीय गिरवर सिंह बिसेन की पुण्य स्मृति एवं स्वर्गीय हनुमान

भोपाल। शासकीय गीतांजलि कन्या स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल में

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

1936 मेंविचार-विमर्श के उपरांत उन्होंने वर्धा में राष्ट्र सेविका समिति : वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी): नारी संगठन, संस्कार और राष्ट्रसेवा की प्रेरक व्यक्तित्व

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Jul 6, 2026

वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी): नारी संगठन, संस्कार और राष्ट्रसेवा की प्रेरक व्यक्तित्व

राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापिका एवं प्रथम प्रमुख संचालिका वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) का जीवन भारतीय नारी शक्ति के संगठन, संस्कार और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। उनका जन्म 5 जुलाई 1905 को नागपुर में हुआ था। उनका बाल्यकाल का नाम कमल दाते था।

वर्ष 1936 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से विचार-विमर्श के उपरांत उन्होंने वर्धा में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य महिलाओं में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण, आत्मरक्षा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना था। समिति का मूल सूत्र है—"स्त्री राष्ट्र की आधारशक्ति है।"

मौसीजी का मानना था कि परिवार, समाज और राष्ट्र के सुदृढ़ निर्माण में नारी की केंद्रीय भूमिका होती है। उन्होंने हजारों महिलाओं को संगठित कर सेवा, संस्कार और स्वाभिमान का संदेश दिया। उनके नेतृत्व में राष्ट्र सेविका समिति का कार्य देश के अनेक राज्यों तथा विदेशों तक विस्तारित हुआ।

27 नवंबर 1978 को उनका निधन हुआ, किंतु उनके द्वारा स्थापित संगठन आज भी नारी सशक्तिकरण, सेवा, शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरण के विविध क्षेत्रों में सक्रिय है। वंदनीय मौसीजी का जीवन भारतीय संस्कृति, संगठन शक्ति और राष्ट्रनिष्ठा का प्रेरक उदाहरण माना जाता है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें