शिक्षित पुरुष भी घर के कार्यों में समान रूप से भागीदारी निभा रहे हैं : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर छिड़ी बहस, घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी पर भी उठे सवाल
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Jul 11, 2026
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर छिड़ी बहस, घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी पर भी उठे सवाल
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हालिया वक्तव्यों ने छात्राओं, मातृत्व, विवाह और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों को संबोधित करते हुए उन्होंने युवाओं को पढ़ाई के दौरान रिश्तों में संयम बरतने की सलाह दी और छात्राओं से कहा कि वे प्रशासनिक अधिकारी बनने से पहले "कुशल और विशेषज्ञ मां" बनने का भी प्रयास करें।
लखनऊ स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा कि आजकल कुछ युवक-युवतियां पढ़ाई के दौरान घर से भाग जाते हैं, जिससे कई बार अवांछित परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसे कदम न उठाने की अपील करते हुए कहा कि इसका दुष्परिणाम बच्चों और समाज दोनों को भुगतना पड़ता है।
वहीं कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि चाहे कोई महिला आईएएस अधिकारी बने, शिक्षक बने या किसी अन्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करे, उसे परिवार और घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों का भी ज्ञान होना चाहिए।
राज्यपाल के इन बयानों पर समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों का मानना है कि आज के समय में घरेलू जिम्मेदारियां केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षित पुरुष भी घर के कार्यों में समान रूप से भागीदारी निभा रहे हैं और परिवार की जिम्मेदारियों को साझा करना आधुनिक एवं समानतामूलक समाज की पहचान है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि सफल परिवार वही है, जहां महिला और पुरुष दोनों एक-दूसरे के सहयोगी बनकर घर और करियर की जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखें।
इस विषय पर चर्चा ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि बदलते सामाजिक परिवेश में घरेलू कार्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को केवल महिलाओं का दायित्व मानना कितना उचित है, जबकि समान भागीदारी और पारस्परिक सहयोग आज के समाज की आवश्यकता बन चुका है।
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