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केवल पत्नी होने के आधार पर उसे अंतरिम गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) नहीं : आर्थिक रूप से सक्षम और पति से अधिक आय वाली पत्नी स्वतः गुजारा भत्ते की हकदार नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Jun 30, 2026

आर्थिक रूप से सक्षम और पति से अधिक आय वाली पत्नी स्वतः गुजारा भत्ते की हकदार नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, उसकी आय पति से अधिक है और उस पर बच्चों के पालन-पोषण अथवा अन्य विशेष वित्तीय दायित्व नहीं हैं, तो केवल पत्नी होने के आधार पर उसे अंतरिम गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) नहीं दिया जा सकता।

न्यायमूर्ति डॉ. चिल्लाकुर सुमलता की एकलपीठ ने मैसूर की ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पति को पत्नी को प्रति माह ₹20,000 अंतरिम गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता का उद्देश्य उस जीवनसाथी को आर्थिक सहायता देना है जो स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, न कि इसे केवल वैवाहिक संबंध या लिंग के आधार पर प्रदान किया जाए।

मामले में वर्ष 2024 में विवाह के कुछ समय बाद पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत याचिका दायर कर प्रति माह ₹1,13,515 अंतरिम गुजारा भत्ता की मांग की थी। रिकॉर्ड के अनुसार पत्नी की मासिक आय लगभग ₹1 लाख थी, जो पति की आय से अधिक थी। पत्नी ने विवाह के लिए लिए गए ऋणों का हवाला दिया, लेकिन उनके संबंध में पर्याप्त साक्ष्य और वित्तीय विवरण प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम गुजारा भत्ता के प्रश्न तक सीमित है और इससे मामले की अंतिम सुनवाई या अन्य वैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके अपने तथ्यों और दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा।

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