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पॉक्सो मामलों में बच्चों को बार-बार कोर्ट में पेश होने के लिए बुलाना : हाईकोर्ट ट्रायल या जमानत सुनवाई के दौरान नाबालिग पीड़ितों की अनावश्यक उपस्थिति से बचा जाए

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Mar 17, 2026

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामलों में नाबालिग पीड़ितों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि पॉक्सो मामलों में बच्चों को बार-बार कोर्ट में पेश होने के लिए बुलाना उनके लिए मानसिक रूप से हानिकारक हो सकता है और इससे वे दोबारा ट्रॉमा का शिकार हो सकते हैं।

न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने निचली अदालतों को निर्देश देते हुए कहा कि ट्रायल या जमानत सुनवाई के दौरान नाबालिग पीड़ितों की अनावश्यक उपस्थिति से बचा जाए। अदालत ने जोर दिया कि बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और बाल-मित्र (चाइल्ड फ्रेंडली) प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों की सुनवाई करते समय पीड़ित बच्चों की मानसिक स्थिति और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि उन्हें न्याय प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त मानसिक कष्ट न झेलना पड़े।

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