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यदि मांग दबाव और उत्पीड़न के माध्यम से कराई जाती है, तो वह दहेज : पत्नी पर पैतृक संपत्ति का हिस्सा लाने का दबाव भी दहेज की मांग, कलकत्ता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

Ashwani Kumar Sinha

Wed, Jul 8, 2026

पत्नी पर पैतृक संपत्ति का हिस्सा लाने का दबाव भी दहेज की मांग, कलकत्ता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि किसी महिला का अपने मायके की पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगना उसका वैधानिक अधिकार है। लेकिन यदि पति या उसके परिजन महिला पर लगातार दबाव, जबरदस्ती या उत्पीड़न करके उससे वह हिस्सा लाने की मांग करते हैं, तो ऐसी मांग दहेज की मांग मानी जा सकती है।

खंडपीठ ने कहा कि यदि इस प्रकार की प्रताड़ना के कारण महिला की अस्वाभाविक मृत्यु होती है, तो मामला भारतीय दंड संहिता की तत्कालीन धारा 304बी (दहेज मृत्यु) के दायरे में आ सकता है। न्यायालय ने संबंधित मामले में पति की दहेज मृत्यु के अपराध में दोषसिद्धि को बरकरार रखा, हालांकि उसकी आजीवन कारावास की सजा घटाकर 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दी। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर सास-ससुर को बरी कर दिया गया।

यह फैसला स्पष्ट करता है कि महिला के पैतृक संपत्ति पर अधिकार और उस अधिकार को पति या ससुराल पक्ष द्वारा दबावपूर्वक हासिल कराने की मांग—दो अलग-अलग बातें हैं। यदि मांग दबाव और उत्पीड़न के माध्यम से कराई जाती है, तो वह दहेज की मांग के रूप में देखी जा सकती है। यह निर्णय हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर आधारित है।

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