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भोपाल। शासकीय गीतांजलि कन्या स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल में

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: करीबी रिश्तेदारों को दिए गए मौखिक मृत्यु-पूर्व कथन को अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल करने से पहले सावधानीपूर्वक मूल्यांकन की आवश्यकता: सुप्रीम कोर्ट

Admin

Mon, Nov 4, 2024
✍️ --------------------------- *करीबी रिश्तेदारों को दिए गए मौखिक मृत्यु-पूर्व कथन को अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल करने से पहले सावधानीपूर्वक मूल्यांकन की आवश्यकता: सुप्रीम कोर्ट* सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब दोषसिद्धि मृतक के करीबी रिश्तेदार को दिए गए मौखिक मृत्यु-पूर्व कथन पर आधारित होती है तो न्यायालयों को अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए करीबी रिश्तेदार की गवाही पर विश्वास करने में उचित सावधानी बरतनी चाहिए। जस्टिस सी.टी. रविकुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने ऐसे मामले की सुनवाई की, जिसमें अभियोजन पक्ष ने मृतक द्वारा अपनी मां को दिए गए मौखिक मृत्यु-पूर्व कथन के आधार पर अभियुक्त के अपराध को साबित करने का प्रयास किया। निचली अदालत ने मृतक की मां की गवाही के आधार पर हत्या के मामले में अभियुक्त को दोषी ठहराया, जिसमें उसने कहा कि उसके बेटे (मृतक) ने अभियुक्तों के नाम बताते हुए मौखिक मृत्यु-पूर्व कथन दिया था। *केस टाइटल: मध्य प्रदेश राज्य बनाम रमजान खान और अन्य।*

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